अग्नि के शॊलॊं से बचना
बुराई का दहकना
होलिका का जलना
कृष्ण और गोपीयॊं का प्यार
गुलाल और रंगॊं की फुहार
अपनों का मिलन
दुश्मनी का दहन
त्योहर की उमंग
मस्ती की तरंग
बुराई का दहकना
होलिका का जलना
कृष्ण और गोपीयॊं का प्यार
गुलाल और रंगॊं की फुहार
अपनों का मिलन
दुश्मनी का दहन
त्योहर की उमंग
मस्ती की तरंग
प्रकृति तो हमेशा ही, मेरी सुंदर माँ जैसी है.
गुलाबी सुबह से माथा चूम कर, हँसते हुए उठाती है,
गर्म दोपहर मे ऊर्जा भर के, दिन खुशहाल बनाती है,
रात की चादर में सितारे जड़ कर, मीठी नींद सुलाती है,
प्रकृति तो हमेशा ही, मेरी सुंदर माँ जैसी है.
हरे पेड़ों से साँसे देकर, जीवन हमको देती है,
मीठा नीर बहा नदियों मे, हरदम हमें पालती है,
खिला के खूबसूरत फूलों को, जीवन मे रंग भरती है.
प्रकृति तो हमेशा ही, मेरी सुंदर माँ जैसी है.
Gulabi subah se matha choom kar, Hasate hue Uthati hai
Garam dopahar me Oorja bhar ke , Din khushhaal banati hai
Raat ki chaadar me sitare jad kar, meethi neend sulati hai
Prakruti to hamesha hi , meri sundar maa jaisee hai.
Hare pedo se saanse dekar, jeevan humko deti hai
Meetha neer baha nadiyon me, hurdam hame Palati hai
Khila ke khoobsoort phoolon ko , jeevan me rang bharati hai
Prakruti to hamesha hi , meri sundar maa jaisee hai