वादा देकर निभाया शिद्दत से ,
फिर भी गये वो साथ छोड़ कर.
शायद वो फिर से आ जाएँ,
देख रहे हम वादा तोड़ कर.
दबाई थी कविताओं की पंक्तियाँ जहाँ,
ढूँढ रहें है आज वहीं पर धरती खोद कर.
किस्मत ने बदलीं जो राहें कहीं,
आओ देखें उन्हे फिर से कहीं जोड़ कर.
कर रहे हैं इंतज़ार आज भी वहीं,
बिछड़े थे कल हम जिस मोड़ पर.