साथ – साथ
ख्वाहिशों के जॅंगल मे
हर दरख़्त एक मंज़िल होता है
और हर रास्ता भी
मंज़िलों से घिरा होता है
हम ख्वाब चुनते है
ख्वाहिशों के संग बुनते है
मंज़िलें पिरोते है
रास्ते तराशते है
नयी ख्वाहिशें
नयी राह बनती है
और हर नयी राह
पुराने राहों से दूर ले जाती है
कुछ राहों मे
हम अकेले होते है
कुछ राहों मे
कोई साथ होता है
कोई होता है
जिसे हम हर राह मे चाहते है
कोई होता है
जो हर राह मे हमारे साथ होता है
कभी रास्ते पीछे छूट जाते है
कभी साथ बदल जाते है
हमें ही चुनना होता है
रास्ता बदले या साथ
हम चाहते है
कुछ नयी मंज़िलों को
पर बँधे भी होते है
कुछ पुराने रिश्तों से
छोड़ नही पाते उन्हे
कुछ पल के लिए भी
और निभा भी नही पाते
नये रिश्तों को
हर मोड़ पे
जाने अंजाने
कुछ खोते है
कुछ पाते है
हम भूल जाते है
कभी पाने को
कभी भूल जाते है
खोने को
नये रास्तों से ज़्यादा
कठिन होता है
पुराने रिश्तों को
हमसे दूर करना
हमारे रास्ते
उलझ जाते हैं
और फिर हम भटकते रह जाते हैं
उन्ही ख्वाहिशों के जंगल में
हमें ही ढूँढना होता है
नये रास्ते को
चुनना होता है
खोने और पाने को
और तभी हम पाते हैं
नयी मंज़िलों को
नये ख्वाबों को
और नये अरमानो को