एक साथ
शुरू हुआ था सात फेरों से
और बना
जन्मों जन्मों के लिए
वक़्त की
बेरहम लहरों मे
साथी
ओझल हो गया आँखों से
कमी
ज़िंदगी मे बन गयी
हमेशा
हमेशा के लिए
वक़्त भी
कोई किताब नही है
पलट के
कुछ पन्ने फिर पढ़ सकूँ
यादें
जो कभी धुँधली नही हुई
आज भी
ज़िंदा है उसी ताज़गी के साथ
नही चाहता
उन यादों को भूलना
जीना चाहता
हूँ उन यादों की फिर से
जो ओझल
होकर के भी साथ है
छोटी सी
श्रद्धांजलि उनके जन्मदिन पे आज.
यह साथ हमेशा बना रहे.