स्वाद प्यार का अमृत जैसा.

बारिश की पहली बूँद के जैसा
प्रत्युषा की पहली किरण के जैसा
अनगिनत झिलमिल तारों में
दूज के चाँद की झलक के जैसा.

भूखे की रोटी के जैसा
प्यासे के पानी के जैसा
मरुस्थल की तपती गर्मी मे
झिरमिर गिरते सावन जैसा.

गुदगुदाते अहसासों में
प्रेमिका के आलिंगन के जैसा
गुलाबी लरजकते होंठो पर
चुंबन के पहले पल के जैसा.

माँ की गोद मे बचपन जैसा
लड़कपन की अठखेलियों जैसा
जवानी के अहंकार मे
परिपक्वता के दर्शन के जैसा.

मंदिर में भजनों के जैसा
मस्जिद मे अजानों जैसा
गुरुद्वारों मे शबद के जैसा
गिरिजा के घड़ियालों जैसा

सागर के मंथन से उपजे
स्वाद प्यार का अमृत जैसा.

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