काश मैं एक बादल होता
ऊँचाइयों पे उड़ता फिरता
मंद हवा मे लहराता रहता
तूफ़ानों संग मौज करता
वादियों की बाहों मे रहता
पर्वतों के सिर पे चढ़ता
कड़ी धूप मे छाँव बनता
सूखे खेतों को सींचता रहता
धरती की प्यास बुझाता
लोगों की मैं आस बढ़ाता
कोई मुझको भी प्यार करता
मेरे आगोश मे भी कोई रहता
काश मैं एक बादल होता
ऊँचाइयों पे उड़ता फिरता