कितनी नाज़ुक, कितनी मजबूत

रिश्तों की डोर की मज़बूती
निभाने की ताक़त पे होती है
निभाया ना जाए
तो हवा भी से टूट जाती है
हौसला हो तो
आँधियों मे भी निभ जाती है

बँधता कोई नही
इन रिश्तों की डोर से
सिर्फ़ आपस की दूरियाँ
ही बताती है यह डोर
जितनी मजबूत
उतने पास
जितनी कमजोर
उतनी ही दूर

प्यार से जितना गूँथते है
मजबूत उतना होती है
छोड़ा विश्वास जो
डोरी ख़तम होती है
बँध जाते है अंजाने भी
जन्मो के बंधन मे
डोरियाँ रिश्तों की
इतनी मजबूत होती है.

सदा रहेगा साथ हमारा

कभी ढूंढता हूँ
टिमटिमाते तारों मे तुम्हे
कभी महसूस करता हूँ
मेरे साथ ही तुम्हें

किसी और जहाँ मे चले गये
साथ हमारा छोड़ गये
दिल मे तो बसे हो हमेशा
पर आँखों से ओझल हो गये

वादा जो साथ का था
मैं अब भी निभा रहा हूँ
हाथ मे हाथ ना ही सही
साथ चले जा रहा हूँ

तुम रहो कहीं भी
कोई भी हो रूप तुम्हारा
पूरा यकीन है मुझे
सदा रहेगा साथ हमारा