अब अपने ही घर मे हम
मेहमान बन के आते है
गलियों मे जहाँ हमने
गुज़ारा था अपना बचपन
उन्ही मे गुज़रते हुए
यादों मे खो जाते है
करते हुए विदा अपनो को
होठों से मुस्कुराते हुए
गीली आँखों के किनारे
साथ लिए जाते है.
अब अपने ही घर मे हम
मेहमान बन के आते है
जाते जाते घर भी
बिखरा छोड़ जाते है.