वो आ कर बैठ गया
रिंग के किनारे पे
और अब मैं कुछ पढ़ पा रहा था
उसकी आँखों को
क्यों की वो ही थीं जो छुपी नही ती
बाकी सब तो छुपा हुआ था आखों मे कुछ खुशी तो थी
सबका मनोरजन करने की
पर फिर भी आँखे खुश नहीँ थी वो जानता था
तालियाँ बजाने वाले,
खुश होने वाले
उसके पिटने पर हँसने वाले
उसे जानते भी नही की वो कौन है शो ख़तम होगा
चले जाएँगे सब लोग
अगर कुछ याद रहेगा भी तो
वो झूठी मुस्कान और पागलपन
जोकर और कुछ भी तो नही उसके अलावा एक आइस्क्रीम वाला
घूम रहा था आस पास
जोकर के सामने बैठे परिवार ने
सबके लिए आइस्क्रीम खरीदी
और खाने लगे सर्कस देखते हुए अब जोकर की आँखें
कुछ बदली नज़र आने लगी
चेहरा तो अभी भी मुस्कुरा रहा था
पर आँखे कुछ तरस रही थी मेरा पूरा ध्यान अब जोकर पर ही था
उसकी आँखे और दिल
आइस्क्रीम की लालसा रखते थे
उसके लिए आइस्क्रीम एक बड़ी चीज़ थी
वो शायद इतनी आसानी से नही पा सकता था शायद वो सोच रहा था
मेरे लिए तालियाँ बजाने वाले
खुश हो के हँसने वाले
मुझे भी आइस्क्रीम दे दें पर ऐसा होता नही है
जोकर के बारे मे कोई सोचता नही है
वो देखता रहा
उनको बड़ी देर तक
पर किसी ने उसको पूछा नही एक बच्च्चे ने
आइस्क्रीम जोकर को दिखाई
जोकर को चिढ़ा दिया
और खुद खा गया जोकर का चेहरा
अभी भी मुस्कुरा रहा था
जोकर की आँखें
मुरझा रही थी
पर सब लोग
इस पर भी हंस ही रहे थे
खुश हो रहे थेजोकर निराश और उदास था
फिर भी सबको हंसा ही रहा था
हाँ
यही तो जोकर का काम हैवो सोचता भी होगा
अपने खुद के बारे मे
पर उसको बोलने का अधिकार नही है
बोलेगा भी
तो सुनेगा कौन
सुनेगा भी
तो समझेगा कौन
समझेगा भी
तो याद रखेगा कौन
याद रहा भी
तो जोकर को खुश करेगा कौनशो ख़त्म होगा
हम भी चले जाएँगे
सर्कस का नाम याद रखेंगे
जोकर के करतब याद रखेंगे
पर जोकर को भूल जाएँगेमैं भूलना नही चाहता था
उस जोकर को
जो खुद तो तरस रहा था
फिर भी सबको हंसा रहा था
मैं पूरी कोशिश कर रहा था
उसका पहचान ढूँढने की
उसका चेहरा ढूँढने की
चेहरा तो उसका था ही नही
इसलये उसकी आँखों को ही देख रहा था
आँखो और हरकतों से ही
उसका चेहरा गढ़ने की कोशिश कर रहा था
चेहरा धीरे धीरे बनने लगा
और फिर पूरा बन भी गया
जब चेहरे को ध्यान से देखा
कुछ जाना पहचाना सा लगा
यह वही चेहरा था
जो मैं रोज देखता हूँ
आईने में
हाँ .. मेरा ही चेहरा
नज़र आया मुझे जोकर मे
अब मैं पा रहा था
खड़ा हुआ अपने आप को सर्कस में
देख रहा था सब तरफ़
कोशिश कर रहा था पढ़ने की
कौन हंस रहा है
मेरी झूठी मुस्कान देख कर
कौन हंस रहा है
मेरी बेवकूफ़ना हरकतों पर
कौन हंस रहा है
मेरे चिढ़ने पर
कौन हँस रहा है
मेरे दर्द पर
मेरा चेहरा मुस्कुरा रहा था
आँखें भर आई थी
मैं नही ढूँढ पाया
कोई चेहरा
जो पढ़ रहा हो मेरी आँखों को
जो सोच रहा हो मेरे बारे मे
जो याद रखेगा मुझे कल भी
जो पहचानेगा मुझे भी
जितना पोंछता रहा आँखो को
उतनी ही धुंधली होती गयी
अब तो पास के चेहरे भी
नही पढ़ पा रहा था मैं.
अब मैं खड़ा हूँ
वहीं पर रिंग मे
कोई तो होगा जो सोचेगा मेरे बारे मे
और हाथ पकड़ के ले जाएगा साथ मे
जोकर के चेहरे की ज़रूरत तो सबको होती है
किसी को भी तो मेरे चेहरे की ज़रूरत होगी
मगर मैं तो यह भी नही जानता
क्या कोई पसंद भी करेगा
मेरे इस छुपे हुए चेहरे को
या जानकर असली चेहरा
मेरे ऊपर फिर कोई मुखौटा लगा देगा
शायद मेरी दुनिया भी यही रिंग है
रिंग को मेरी ज़रूरत हो या ना हो
मेरी पहचान यही रिंग है
और जोकर ही मेरा चेहरा है.
जानते हुए अपनी असलियत को
फिर भी कभी कभी
ज़िद कर बैठता हूँ
आइस्क्रीम खाने की
माँग बैठता हूँ
एक क़तरा
उम्मीद रखता हूँ
कुछ पाने की
कोई हँसता है मेरी इस ग़लती पर
कोई मना कर के चला जाता है
कोई झूठा वादा कर के
पीछा छुड़ा कर चला जाता है
और मैं सच मान कर
बैठा रहता हूँ इंतजार में
जब तक की कोई मुझे
आईना दिखा नही देता
मेरी असलियत याद दिला नही देता
मैं फिर चल देता हूँ
अपनी रिंग मे
फिर वही मुस्कान लिए
पर अब मैं भी नही जानता
की मुस्कान असली है या दर्द